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एक सच्चे देशभक्त की कहानी

  • Writer: Suraj Sondhiya
    Suraj Sondhiya
  • Nov 12
  • 2 min read

भारत के एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक साधारण लड़का रहता था। उसका बचपन खेतों में खेलते, नदी में नहाते और स्कूल जाते हुए बीता। लेकिन एक चीज़ थी जो उसे दूसरों से अलग बनाती थी — उसका देश के प्रति प्रेम।


जब गाँव में 15 अगस्त या 26 जनवरी का झंडा फहराने का दिन आता, तो अर्जुन सबसे पहले स्कूल पहुँच जाता था। झंडा फहराते समय उसकी आँखों में चमक होती, जैसे उस तिरंगे में ही उसका सपना बसता हो।


एक दिन उसके शिक्षक ने पूछा,


“अर्जुन, बड़े होकर क्या बनना चाहते हो?”


अर्जुन ने बिना एक पल गँवाए कहा,


“मुझे अपने देश की सेवा करनी है, सर। मैं सैनिक बनना चाहता हूँ।”


यह सुनकर पूरा क्लास तालियों से गूंज उठा।


सेना में भर्ती


समय बीता, और अर्जुन ने अपने सपने को सच कर दिखाया। वह भारतीय सेना में भर्ती हुआ। जब उसने पहली बार यूनिफॉर्म पहनी, तो उसके माता-पिता की आँखों में गर्व के आँसू थे। माँ ने माथे पर तिलक लगाया और कहा,


“बेटा, अब तू सिर्फ हमारा नहीं, पूरे देश का बेटा है।”


सीमा पर संघर्ष


एक रात सीमा पर अचानक दुश्मनों ने हमला कर दिया। चारों तरफ गोलियों की बौछार थी। फिर भी अर्जुन डटा रहा।

उसने अपने साथियों को हिम्मत दी और दुश्मनों को पीछे धकेल दिया।

एक गोली उसके कंधे पर लगी, पर वह रुका नहीं। उसने रेडियो पर मैसेज भेजा —


“मिशन पूरा हुआ… भारत माँ की जय।”


सुबह जब सूरज उगा, तो दुश्मन पीछे हट चुके थे। अर्जुन गंभीर रूप से घायल था, लेकिन उसकी आँखों में सुकून था।


अमर वीर


अर्जुन को बाद में “शौर्य चक्र” से सम्मानित किया गया। उसका गाँव आज भी हर साल 15 अगस्त को उसकी प्रतिमा पर फूल चढ़ाता है।

बच्चों को बताया जाता है कि —


“देशभक्ति सिर्फ वर्दी पहनने में नहीं, बल्कि अपने हर काम को ईमानदारी से करने में है।”

 
 
 

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