top of page
Search

“उस एक कदम ने सब बदल दिया”

  • Writer: Suraj Sondhiya
    Suraj Sondhiya
  • Nov 22, 2025
  • 1 min read

एक छोटे कस्बे में अर्जुन नाम का युवक रहता था। उसके सपने बड़े थे, लेकिन हालात छोटे। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और लोग हमेशा उसे यही कहते थे—

“तेरे बस का कुछ नहीं, नौकरी कर ले… सपने मत देखा कर।”


अर्जुन चुप रहता, लेकिन भीतर कहीं न कहीं एक आग जलती रहती। उसका सपना था अपना खुद का छोटा-सा बिज़नेस शुरू करना। पर उसके पास न पैसा था, न अनुभव।


एक दिन वह शहर गया, जहाँ उसने एक सफल व्यापारी को कहते सुना—

“हारने वाला वो नहीं होता जो गिरता है… हारने वाला वो होता है जो उठने की सोचता ही नहीं।”


ये शब्द उसकी आत्मा में उतर गए।


उसने फैसला किया कि वह रोज़ सिर्फ एक छोटा कदम अपने सपने की तरफ बढ़ाएगा—

कभी नई चीज़ सीखेगा, कभी बचत करेगा, कभी दुकानें देखकर मार्केट समझेगा, कभी वीडियो देखकर हुनर सीखेगा।


लोग मज़ाक उड़ाते रहे—

“कहाँ सफल होगा तू?”

पर वो हर दिन एक कदम बढ़ाता गया।


छह महीने बाद उसने एक छोटी-सी दुकान किराए पर ली। साल भर में उसकी मेहनत और ग्राहक सेवा ने दुकान को इलाके की सबसे भरोसेमंद दुकान बना दिया।

वही लोग जो कभी कहते थे “कुछ नहीं कर पाएगा”, अब कहते थे—

“अर्जुन, तुमसे सीखना चाहिए… सपना छोटा या बड़ा नहीं होता, कदम छोटा या बड़ा होता है।”


अर्जुन मुस्कुराता हुआ बस एक बात कहता—

“कभी-कभी बस एक सही कदम आपकी पूरी जिंदगी बदल देता है।”

 
 
 

Recent Posts

See All
उम्मीद की सीढ़ी

रमेश एक छोटे से गाँव का रहने वाला था। उसका परिवार बहुत गरीब था। पिता खेतों में मजदूरी करते थे और माँ दूसरों के घरों में बर्तन माँजती थीं। रमेश पढ़ना चाहता था, लेकिन हालात हर दिन उसे पढ़ाई से दूर ले जा

 
 
 
खामोश घंटी

छोटे से कस्बे में एक पुराना स्कूल था। उसकी दीवारों पर समय की परतें जमी थीं और आँगन में लगा पीपल का पेड़ हर सुबह बच्चों की हँसी सुनता था। उसी स्कूल में पढ़ता था आरव—शांत, कम बोलने वाला, लेकिन आँखों में

 
 
 
आख़िरी दीया

रात का समय था। पूरा गाँव अँधेरे में डूबा हुआ था। बिजली कई दिनों से नहीं आई थी। केवल रामू के घर के बाहर एक छोटा-सा दीया जल रहा था। वही दीया पूरे गाँव के लिए उम्मीद की तरह चमक रहा था। रामू गाँव का साधार

 
 
 

Comments


bottom of page