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आख़िरी दीया

  • Writer: Suraj Sondhiya
    Suraj Sondhiya
  • Dec 22, 2025
  • 2 min read

रात का समय था। पूरा गाँव अँधेरे में डूबा हुआ था। बिजली कई दिनों से नहीं आई थी। केवल रामू के घर के बाहर एक छोटा-सा दीया जल रहा था। वही दीया पूरे गाँव के लिए उम्मीद की तरह चमक रहा था।


रामू गाँव का साधारण किसान था। मेहनत उसकी आदत थी, लेकिन किस्मत हमेशा उसका साथ नहीं देती थी। कभी सूखा पड़ता, कभी फसल खराब हो जाती। लोग कहते, “रामू, अब खेती छोड़ दे, कुछ और कर ले।” लेकिन रामू जानता था कि अगर वह हार मान लेगा, तो उसके बच्चों का भविष्य भी अँधेरे में चला जाएगा।


एक दिन गाँव में एक अफ़सर निरीक्षण के लिए आए। उन्होंने देखा कि पूरे गाँव में अँधेरा है, लेकिन रामू के घर पर दीया जल रहा है। उन्होंने रामू से पूछा, “सबके घरों में अँधेरा है, फिर तुमने दीया क्यों जलाया है?”

रामू ने शांत स्वर में कहा, “साहब, अँधेरे को कोसने से अच्छा है कि एक दीया जला दिया जाए।”


अफ़सर रामू की बात से प्रभावित हो गए। उन्होंने गाँव की स्थिति की जानकारी ली और देखा कि यहाँ सिंचाई, बिजली और शिक्षा की कितनी कमी है। उन्होंने वादा किया कि वे इस गाँव के लिए कुछ करेंगे।


कुछ महीनों बाद गाँव में बदलाव शुरू हुआ। सोलर लाइट लगाई गई, सिंचाई के लिए नया बोरवेल बना और बच्चों के लिए एक छोटा स्कूल भी खुल गया। गाँव में रौनक लौट आई। वही लोग जो रामू को नसीहत देते थे, अब उसकी तारीफ़ करते नहीं थकते थे।


रामू ने अपनी खेती में नए तरीके अपनाए। उसने जैविक खेती शुरू की और धीरे-धीरे उसकी फसल की पहचान आसपास के इलाकों में होने लगी। उसकी आमदनी बढ़ी, बच्चों की पढ़ाई बेहतर हुई और उसका घर खुशियों से भर गया।


एक शाम वही अफ़सर फिर गाँव आए। पूरे गाँव में अब रोशनी थी। अफ़सर ने रामू से कहा, “आज पूरे गाँव में उजाला है।”

रामू मुस्कुराया और बोला, “साहब, ये सब उस दिन जले आख़िरी दीये की वजह से है।”


गाँव वालों को उस दिन समझ आ गया कि बदलाव किसी बड़े शोर से नहीं, बल्कि एक छोटे-से प्रयास से शुरू होता है। अगर हर इंसान अपने हिस्से का एक दीया जला दे, तो कोई भी अँधेरा ज़्यादा देर टिक नहीं सकता।


सीख:

मुश्किल हालात में हार मानना आसान होता है, लेकिन जो इंसान उम्मीद का दीया जलाए रखता है, वही आने वाले समय को रोशन करता है।

 
 
 

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